अगले 3-5 सालों में घर, पढ़ाई या विदेश यात्रा? जानें कौन से म्युचुअल फंड्स आपकी मदद कर सकते हैं!
म्युचुअल फंड की दुनिया में, 5 साल से कम अवधि को 'शॉर्ट-टर्म' माना जाता है। इस दौरान मार्केट में उतार-चढ़ाव आपके पैसे को जोखिम में डाल सकते हैं।
इस अवधि के लिए हमें ग्रोथ पोटेंशियल और रिस्क मैनेजमेंट का संतुलन चाहिए। प्योर इक्विटी यहाँ थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है।
बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (BAFs) मार्केट स्थिति के अनुसार इक्विटी व डेट अनुपात एडजस्ट करते हैं। ये 'मार्केट टाइमिंग' का काम खुद करते हैं, जोखिम कम करते हुए।
अगर आप थोड़ा ज्यादा रिस्क ले सकते हैं, तो एग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स देखें। ये 65-80% इक्विटी में निवेश करते हैं, पर डेट कंपोनेंट सुरक्षा देता है।
लक्ष्य से 6-12 महीने पहले, धीरे-धीरे अपने पैसों को इक्विटी-ओरिएंटेड फंड्स से निकालकर कम जोखिम वाले डेट/लिक्विड फंड्स में शिफ्ट करें। यह 'डी-रिस्किंग' है।
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