अनहोनी के लिए स्मार्ट तैयारी: कितना निवेश करें और कैसे करें?
नौकरी छूटना, बीमारी या गाड़ी खराब होना... जीवन में अचानक मुश्किलें आ सकती हैं। इमरजेंसी फंड न हो तो सेविंग टूटती है या लेना पड़ता है महंगा लोन। यह है आपकी मानसिक शांति का बीमा।
सेविंग अकाउंट से बेहतर! SIP के ज़रिए आप इमरजेंसी फंड को महंगाई से बचाते हैं, डिसिप्लिन से छोटी रकम जोड़ते हैं। एक साथ बड़ी रकम की ज़रूरत नहीं।
3-6 महीने के ज़रूरी खर्चों (जैसे किराया, EMI, किराने का सामान, बिल) के बराबर फंड रखें। आश्रित ज़्यादा हों तो 9-12 महीने का लक्ष्य। अपने मासिक खर्चों का सही अनुमान लगाएं।
इमरजेंसी फंड का मकसद रिटर्न नहीं, सुरक्षा और लिक्विडिटी है। इक्विटी से बचें। लिक्विड फंड (कम जोखिम, तुरंत निकासी) या अल्ट्रा-शॉर्ट ड्यूरेशन फंड चुनें।
फंड की नियमित समीक्षा करें, आय बढ़ने पर SIP बढ़ाएँ (स्टेप-अप SIP)। इस्तेमाल के बाद इसे तुरंत भरें। पूरा पैसा सेविंग में न रखें, इक्विटी से बचें और खर्चों को कम न आंकें।
अपनी वित्तीय सुरक्षा की नींव आज ही रखें! इमरजेंसी फंड SIP का लक्ष्य निर्धारित करें और हमारे SIP कैलकुलेटर का उपयोग करें। विजिट करें: sipplancalculator.in